पंच प्राणों के अंतर्गत विरासत संरक्षण और संस्कृति आधारित आजीविका

पंच प्राणों के अंतर्गत विरासत संरक्षण और संस्कृति आधारित आजीविका

      केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि सरकार ने पंच प्राणों के अनुरूप संस्कृति को आजीविका, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण का स्रोत बनाने के लिए कई नीतिगत और कार्यक्रम संबंधी पहल की हैं।

      संस्कृति मंत्रालय कलाकारों और कला समुदायों की आय और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए लोक कला, जनजातीय परंपराओं, हस्तशिल्प, पारंपरिक ज्ञान और भारतीय भाषाओं तथा शिक्षा, कौशल विकास, पर्यटन और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़कर मूर्त और अमूर्त कला तथा संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु निम्नलिखित योजनाएं कार्यान्वित कर रहा है।

  1. शताब्दी एवं वर्षगांठ योजना
  2. कला संस्कृति विकास योजना
  3. संग्रहालयों का विकास
  4. पुस्तकालयों का विकास
  5. वैश्विक सहभागिता
  6. ज्ञान भारतम मिशन
  7. सांस्कृतिक मानचित्रण और रोडमैप पर राष्ट्रीय मिशन

      इन सभी योजनाओं को मंत्रालय के 43 क्षेत्रीय संगठनों के नेटवर्क द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।

      मंत्रालय ने पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में स्थित मुख्यालय वाले सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए हैं, जो नियमित तौर पर कई सांस्कृतिक उत्सव और कार्यक्रम आयोजि‍त करते हैं। इनमें स्थानीय लोक कलाकारों को शामिल किया जाता है, जिससे कलाकारों और समुदायों को आय और आजीविका मिलती है।

संस्कृति मंत्रालय निम्नलिखित उपायों द्वारा कलाकारों के समुदाय को और सशक्त बना रहा है:

  • कौशल विकास: गुरु-शिष्य परंपरा और क्षमता निर्माण कार्यशालाओं जैसी पहल आधुनिक मांग अनुरूप प्रासंगिक कौशल प्रदान करती हैं। भारतीय धरोहर संस्थान, धरोहर प्रबंधन और संरक्षण में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण प्रदान कर रहे हैं।
  • बाजार संपर्क: डिजिटलीकरण, ई-मार्केट प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव, कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और हस्तनिर्मित उत्पादों को सीधे बेचने का अवसर प्रदान करता हैं।
  • प्रमुख त्यौहार: भारतीय कला महोत्सव, विविधता का अमृत महोत्सव, काशी तमिल संगमम, सौराष्ट्र तमिल संगमम, माधवपुर घेड मेला जैसे कार्यक्रम आदिवासी और लोक कलाकारों को राष्ट्रीय ख्‍याति प्रदान करते हैं।
  • संस्थागत सहयोग: संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न संगठन विरासत को पंच प्राणों के साथ जोड़ते हैं और रोजगार, युवा भागीदारी तथा सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु कार्यशालाओं (जैसे मधुबनी चित्रकला, बुनाई), प्रलेखन, अनुसंधान, प्रसार और विज्ञान प्रशिक्षण आयोजित करते हैं।

      संस्कृति मंत्रालय देशभर में 8 संग्रहालयों, भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के 52 पुरातात्विक स्थल संग्रहालयों औरराष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद द्वारा स्थापित विभिन्न विज्ञान संग्रहालयों का भी प्रबंधन करता है, जो स्थानीय रोजगार सृजन में सहायक है।

      जन भागीदारी प्रोत्साहित करने के लिए, मंत्रालय ने ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज कार्यक्रम का द्वितीय चरणआरंभ किया है, जो सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के साथ संरचित साझेदारी को सुगम बनाता है। लोगों के अनुभव और स्थानीय आजीविका बेहतर बनाने के उद्देश्य से गैर-संरक्षण गतिविधियों के लिए अब तक, 30 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

      इसके अलावा, भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विश्व धरोहर दिवस जैसे आयोजनों के दौरान राष्ट्रीय विरासत के प्रति जागरुकता और स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जन-केंद्रित पहल करता है।

साभार पी आई बी

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