चंदौसी का ऐतिहासिक गणेश चौथ मेला: एक छोटे प्रयास से भव्य परंपरा तक का सफर

चंदौसी का ऐतिहासिक गणेश चौथ मेला: एक छोटे प्रयास से भव्य परंपरा तक का सफर

चंदौसी (संभल)। ‘आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता की अनोखी मिसाल’ बन चुका चंदौसी का गणेश चौथ मेला आज अपने विशाल स्वरूप के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इस ऐतिहासिक मेले की नींव वर्ष 1961 में चंदौसी के प्रथम एमबीबीएस और एमडी चिकित्सक डॉ. गिरिराज किशोर द्वारा रखी गई

थी। शुरुआत में उन्होंने अपने हाथों से भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा तैयार की और उसे ठेले पर रखकर नगर में शोभायात्रा निकाली थी।एक छोटे प्रयास से विशाल मेले का रूप में तब्दील हो गई।शुरुआती दिनों में गणेश मंदिर के आसपास केवल पूजा-अर्चना और प्रसाद की कुछ दुकानें ही लगती थीं। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और यह आयोजन एक बड़े मेले के रूप में तब्दील हो गया। शुरुआत में यह मेला केवल सात दिन तक आयोजित होता था, जो समय के साथ बढ़कर अब करीब 21 दिनों तक चलता है।बढ़ती भीड़ और असुविधा को देखते हुए डॉ. गिरिराज किशोर ने मंदिर के आसपास की जमीन लेकर मेले को एक व्यवस्थित स्वरूप दिया, जो आज चंदौसी की पहचान बन चुका है।

दिसंबर 2021 में डॉ. गिरिराज किशोर का निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई यह परंपरा उनके निधन के बाद भी निरंतर आगे बढ़ रही है। वर्तमान में डॉ साहब के परिवार के मनोज कुमार मीनू, रवींद्र कुमार, ललित किशोर गुप्ता, डॉ राजीव कुमार,संजय गुप्ता व वरदान गुप्ता इस पर परंपरा को अपने संसाधनों व प्रयासों से जारी रखे हुए है।
साथ में परिवार की बहू श्रीमती योजना गुप्ता जो कि देश की अग्रणी समाज सेवी संस्था जायंट्स वेलफेयर फाउंडेशन 5 की यूनिट निदेशक भी है इस परंपरा को आगे बढ़ाने में परिवार का पूरी तरह से सहयोग कर रही है।


वर्ष 2026 में मेले का 66वां आयोजन 12 सितंबर से 2 अक्टूबर तक जारी है।
मेले को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 16 ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 317 दुकानों का आवंटन किया गया है।इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भव्य रथयात्रा और आकर्षक झांकियां हैं।

समय के साथ एक छोटी सी शोभायात्रा ने अब एक भव्य रूप ले लिया है। वर्तमान में स्वचालित (ऑटोमैटिक) झांकियां और रथयात्रा इस मेले का मुख्य आकर्षण होती हैं, जिन्हें देखने दूर-दराज से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ चंदौसी पहुंचते हैं।
मेले की मुख्य बातें
(एक नजर में)
शुरुआत: वर्ष 1961 में डॉ. गिरिराज किशोर द्वारा।
वर्तमान अवधि: 21 दिन।वर्ष 2026 में आयोजन तिथि: 12 सितंबर से 2 अक्टूबर।
ब्लॉकों की संख्या: 16 ब्लॉक।दुकानों का आवंटन: 317 दुकानें।
मुख्य स्वरूप: भव्य रथयात्रा, आकर्षक झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम।

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