
—सूरज सिंह
गाजियाबाद। खोड़ा कॉलोनी में हुए सूर्य चौहान हत्याकांड में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से जनता का कानून व्यवस्था एवं सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। मुख्य आरोपी के विरुद्ध हुई कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों को भी शीघ्र कठोर सजा दिलाई जानी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय मिल सके।
यह मांग सूरज सिंह, निजी सहायक – पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश डॉ. सूर्य कुमार शुक्ल, प्रदेश प्रभारी – सुशासन तथा केंद्र-राज्य शासकीय समन्वय विभाग भाजपा एवं उत्तर प्रदेश सचिव – पश्चिमी उत्तर प्रदेश, क्षत्रिय करणी सेना ने की।
सूरज सिंह ने कहा कि खोड़ा सूर्य हत्याकांड, दिल्ली के तरुण हत्याकांड तथा देशभर में होने वाली ऐसी घटनाओं को अब केवल सामान्य हत्या मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की हत्या उसकी जाति, धर्म, विचारधारा, सामाजिक पहचान या समाजहित में आवाज उठाने के कारण की जाती है तो ऐसे मामलों के लिए अलग और विशेष कानून बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में दोषी को कठोरतम दंड दिया जाए तथा दोषी परिवार की सम्पूर्ण चल-अचल संपत्तियों की जांच कर उन्हें जब्त एवं कुर्क करने का कानून बनाया जाए। जब्त संपत्ति का एक बड़ा भाग पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाए तथा शेष धनराशि समाज एवं राष्ट्रहित के विकास कार्यों में लगाई जाए।
सूरज सिंह ने कहा कि इस मांग का उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को दंडित करना नहीं बल्कि समाज में ऐसी जिम्मेदारी विकसित करना है जिससे परिवार अपने बच्चों को अपराध की राह पर जाने से रोकें। यदि परिवारों को यह भय होगा कि हत्या जैसे जघन्य अपराध के कारण पूरा परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो सकता है, तो वे अपने बच्चों को अपराध, कट्टरता और हिंसा से दूर रखने के लिए अधिक जिम्मेदारी निभाएंगे।
उन्होंने आगे मांग की कि संसद एवं सरकार ऐसे मामलों में नागरिकता, मतदान अधिकार, सरकारी सुविधाओं तथा अन्य नागरिक विशेषाधिकारों को सहपरिवार रद्द करने के संबंधित कठोर प्रावधानों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा प्रारंभ करे। इस विषय पर संवैधानिक, विधिक एवं सामाजिक विशेषज्ञों की समिति गठित कर ऐसे प्रावधानों की व्यवहारिकता और प्रभाव का अध्ययन किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार कठोर कानून बनाया जाए, जिससे समाज में यह स्पष्ट संदेश जाए कि धर्म, जाति या नफरत के नाम पर हत्या करने वालों तथा उन्हें संरक्षण देने वालों के लिए देश में कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा अपराधियों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति भी समाप्त होनी चाहिए। यदि ऐसे मामलों में कठोर कानूनी और राजनीतिक परिणाम तय होंगे तो कोई भी दल अपराधियों को बचाने या उनके पक्ष में खड़े होने से पहले कई बार सोचेगा। इससे राजनीति का अपराधीकरण भी कम होगा।
सूरज सिंह ने समाजसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनहित में आवाज उठाने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए अलग कानून और मुआवजा नीति बनाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि अनेक बार समाजहित में कार्य करने वाले लोगों की हत्या केवल इसलिए कर दी जाती है क्योंकि वे अपराध, भ्रष्टाचार और अन्य सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध खड़े होते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को विशेष आर्थिक सहायता, सुरक्षा और कानूनी सहयोग मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अपराध करने के बाद वीडियो बनाकर अपनी पहुंच, पैसे और प्रभाव का प्रदर्शन करने वाले अपराधियों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे वीडियो तत्काल हटाए जाएं तथा अपराध का महिमामंडन करने वाली सामग्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और युवाओं में गलत संदेश जाता है।
सूरज सिंह ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की कि उपरोक्त सभी विषयों पर एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय समीक्षा समिति गठित कर समयबद्ध रिपोर्ट तैयार कराई जाए तथा उसके आधार पर कठोर एवं प्रभावी कानून लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धर्म, जाति, वैचारिक घृणा या समाजसेवा के कारण किसी निर्दोष की हत्या करने का साहस न कर सके।